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लेख

वक्री ग्रह

वक्री गति ग्रह की पृथ्वी से दिखाई देने वाली उलटी चाल है। यह पृथ्वी और ग्रह की अलग कक्षाओं तथा उनकी सापेक्ष गति से बनती है। ज्योतिष में इसका संबंध चेष्टा बल से है; पुनर्विचार, दोहराव और पुराने विषयों की वापसी इसकी लोकप्रिय आधुनिक व्याख्याएँ हैं।

संक्षेप में

  • मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि वक्री हो सकते हैं।
  • सूर्य और चंद्रमा वक्री नहीं होते। औसत राहु-केतु हमेशा वक्री हैं; स्पष्ट राहु-केतु कभी-कभी थोड़े समय के लिए मार्गी हो सकते हैं।
  • बाहरी ग्रहों का वक्री काल विरोध और पृथ्वी से अपेक्षाकृत कम दूरी के आसपास आता है। बुध और शुक्र की दृश्यता पर सूर्य से कोणीय दूरी और कलाओं का भी असर होता है।
  • ज्योतिष में वक्री होना बल का चिह्न है, कमज़ोरी का नहीं।
  • अगला वक्री बुध: 24 अक्टूबर – 13 नवंबर 2026।

ग्रह उलटे क्यों चलते हैं

पृथ्वी और ग्रह अलग-अलग गति से सूर्य की परिक्रमा करते हैं। जब पृथ्वी किसी बाहरी ग्रह से आगे निकलती है (या कोई आंतरिक ग्रह पृथ्वी से आगे निकलता है), तो पृथ्वी से वह ग्रह रुकता और राशिचक्र में पीछे चलता दिखता है। यह आभासी प्रभाव है, पर ज्योतिषीय रूप से महत्वपूर्ण: बाहरी ग्रहों के लिए यह अपेक्षाकृत कम दूरी और अधिक चमक के आसपास का समय हो सकता है। बुध और शुक्र में चमक तथा दृश्यता सूर्य से दूरी और कलाओं पर भी निर्भर करती है।

जन्म कुंडली में वक्री

शास्त्र वक्री ग्रह को पूरा चेष्टा बल देते हैं — गति का बल: वह बलवान और लगनशील होता है। कुछ आधुनिक मनोवैज्ञानिक व्याख्याओं में उसके विषय भीतर से और लौट-लौटकर जिए जाते हैं: व्यक्ति पुनर्विचार करता है, फिर से गढ़ता है, निखारता है। वक्री शनि अक्सर गहरी ज़िम्मेदारी और देर से परिपक्वता लाता है, वक्री गुरु अपना, कठिनाई से कमाया गया दर्शन।

गोचर में वक्री

वक्री काल में ग्रह उन अंशों पर लौटता है जिन्हें वह पार कर चुका है, और उसके विषय फिर से सामने आते हैं। वक्री बुध अनुबंधों और उपकरणों को दोबारा जाँचने का संकेत है; वक्री शनि अधूरे दायित्वों पर लौटने का। यह कर्म पर रोक नहीं, बल्कि सावधानी का निमंत्रण है।

अगले कालखंड

JyotiSoft की गणना के अनुसार (निरयण, लाहिरी) बुध 24 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक वक्री है। विस्तार से: वक्री बुध, शरद 2026।

सवाल-जवाब

क्या वक्री ग्रह कमज़ोर होता है?
नहीं। ज्योतिष में उसे गति का पूरा बल मिलता है; बल नहीं, दिशा बदलती है — पुनर्विचार और दोहराव की ओर।
क्या सूर्य वक्री हो सकता है?
सूर्य और चंद्रमा वक्री नहीं होते। औसत राहु-केतु वक्री रहते हैं; स्पष्ट राहु-केतु की गणना में छोटे मार्गी अंतराल संभव हैं।
बुध कितनी बार वक्री होता है?
साल में लगभग तीन बार, लगभग तीन-तीन सप्ताह के लिए।
स्थिर (मार्गी होने से पहले) ग्रह क्या है?
मुड़ने का क्षण (स्तंभन), जब ग्रह लगभग ठहरा होता है। उन दिनों उसका प्रभाव विशेष रूप से प्रबल होता है।

यह भी देखें

स्थितियाँ और तालिकाएँ: निरयण राशिचक्र, लाहिरी अयनांश — जैसा पेशेवर ज्योतिषी उपयोग करते हैं; वही गणना जिससे JyotiSoft कुंडली बनाता है। अद्यतन 2026-10-10.

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