पंचांग
पंचांग — जयपुर, 4 अक्टूबर 2026
जयपुर के लिए दिन का वैदिक पंचांग: पंचांग के पाँच अंग उनके बदलने के समय के साथ, सूर्योदय और सूर्यास्त, अशुभ और शुभ काल। हर दिन स्थानीय सूर्योदय से दोबारा गणना।
4 अक्टूबर 2026
अगला पर्व: महालया · सर्व पितृ अमावस्या — 10 अक्टूबर 2026, 6 दिन में।
| अंग | मान | किसके लिए शुभ |
|---|---|---|
| तिथि | नवमी (कृष्ण पक्ष) तक 03:54 (+1) | साहसिक, कठोर कार्य; नई शुरुआत के लिए नहीं |
| नक्षत्र | पुनर्वसु तक 00:14 (+1) | वापसी, नवीनीकरण, यात्रा |
| योग | परिघ तक 12:32 | अवरोध; नई शुरुआत के लिए नहीं |
| करण | तैतिल तक 16:52 | घर, निर्माण, आभूषण |
| वार | रविवार | अधिकार, स्वास्थ्य, सरकारी कार्य |
सूर्य और चंद्रमा
| सूर्योदय | 06:20 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 18:10 |
| चंद्रोदय | 00:49 (अगला दिन) |
| चंद्रास्त | 13:59 |
अशुभ काल
| राहुकाल | 16:41–18:10 |
|---|---|
| यमगंड | 12:15–13:44 |
| गुलिक काल | 15:12–16:41 |
शुभ मुहूर्त
| अभिजित | 11:51–12:39 |
|---|---|
| अमृत काल | 21:58–23:29 |
चांद्र पंचांग
| चांद्र मास (अमांत) | भाद्रपद |
|---|---|
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
आज चंद्र राशि के अनुसार
दोपहर में चंद्रमा मिथुन में है, पुनर्वसु नक्षत्र में। 18:32 बजे वह कर्क में प्रवेश करता है।
| आपकी चंद्र राशि | आपकी राशि से आज का चंद्रमा | आपके नक्षत्र से तारा बल | आज किसके लिए अनुकूल |
|---|---|---|---|
| मेष | तीसरा भाव · बलवान 18:32 से: चौथा भाव · कमज़ोर | अश्विनी: वध × भरणी: साधक ✓ कृत्तिका: प्रत्यरि × | भाग-दौड़, फ़ोन, छोटी यात्राओं और छोटी शुरुआतों के लिए ऊर्जा। |
| वृषभ | दूसरा भाव · सामान्य 18:32 से: तीसरा भाव · बलवान | कृत्तिका: प्रत्यरि × रोहिणी: क्षेम ✓ मृगशिरा: विपत् × | परिवार, भोजन और पैसों की बातें। नरमी से बोलें, और आज उधार देने से बचें। |
| मिथुन | पहला भाव · बलवान 18:32 से: दूसरा भाव · सामान्य | मृगशिरा: विपत् × आर्द्रा: संपत् ✓ पुनर्वसु: जन्म ○ | चंद्रमा आपकी अपनी राशि पर है: मन भावुक रहेगा। निजी काम, आराम और शरीर की देखभाल के लिए अच्छा दिन। |
| कर्क | बारहवाँ भाव · कमज़ोर 18:32 से: पहला भाव · बलवान | पुनर्वसु: जन्म ○ पुष्य: अतिमित्र ✓ आश्लेषा: मित्र ✓ | आराम, एकांत और काम पूरे करना; ख़र्च और नींद का ध्यान रखें। |
| सिंह | ग्यारहवाँ भाव · बलवान 18:32 से: बारहवाँ भाव · कमज़ोर | मघा: वध × पूर्वा फाल्गुनी: साधक ✓ उत्तरा फाल्गुनी: प्रत्यरि × | लाभ, मित्र और अनुरोध: जो चाहिए, माँग लीजिए। |
| कन्या | दसवाँ भाव · बलवान 18:32 से: ग्यारहवाँ भाव · बलवान | उत्तरा फाल्गुनी: प्रत्यरि × हस्त: क्षेम ✓ चित्रा: विपत् × | काम और सार्वजनिक ज़िम्मेदारियाँ: अपना किया हुआ काम दिखाने का दिन। |
| तुला | नौवाँ भाव · सामान्य 18:32 से: दसवाँ भाव · बलवान | चित्रा: विपत् × स्वाती: संपत् ✓ विशाखा: जन्म ○ | गुरु, प्रार्थना, अध्ययन और लंबी यात्राओं की योजना। |
| वृश्चिक | आठवाँ भाव · कमज़ोर 18:32 से: नौवाँ भाव · सामान्य | विशाखा: जन्म ○ अनुराधा: अतिमित्र ✓ ज्येष्ठा: मित्र ✓ | शांत दिन: जोखिम भरे फ़ैसले और पैसों के मामले टालें, बारीकियाँ जाँच लें। |
| धनु | सातवाँ भाव · बलवान 18:32 से: आठवाँ भाव · कमज़ोर | मूल: वध × पूर्वाषाढा: साधक ✓ उत्तराषाढा: प्रत्यरि × | मुलाक़ातें, साझेदारी और समझौते अच्छे चलते हैं। |
| मकर | छठा भाव · बलवान 18:32 से: सातवाँ भाव · बलवान | उत्तराषाढा: प्रत्यरि × श्रवण: क्षेम ✓ धनिष्ठा: विपत् × | अटके काम निपटाने, सेहत की दिनचर्या बनाने और विवाद सुलझाने के लिए अच्छा। |
| कुंभ | पाँचवाँ भाव · सामान्य 18:32 से: छठा भाव · बलवान | धनिष्ठा: विपत् × शतभिषा: संपत् ✓ पूर्वा भाद्रपद: जन्म ○ | पढ़ाई, बच्चे और रचनात्मक काम; जोखिम भरे दाँव से दूर रहें। |
| मीन | चौथा भाव · कमज़ोर 18:32 से: पाँचवाँ भाव · सामान्य | पूर्वा भाद्रपद: जन्म ○ उत्तरा भाद्रपद: अतिमित्र ✓ रेवती: मित्र ✓ | घर और मन की शांति पर ध्यान दें: घर का दिन है, बड़े काम शुरू करने का नहीं। |
चंद्र बल आज के चंद्रमा को आपकी जन्म राशि से गिनता है: पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में बलवान, चौथे, आठवें और बारहवें में कमज़ोर। तारा बल आज के नक्षत्र को आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ करके गिनता है: ✓ शुभ, ○ आपका अपना तारा (मिश्रित), × महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए नहीं। यह आपकी चंद्र राशि वाले सभी लोगों के लिए सामान्य फल है; अधिक निर्णय आपकी कुंडली और चल रही दशा करती है।
जयपुर के लिए समय कैसे पढ़ें
इस पृष्ठ के सभी समय जयपुर के स्थानीय समय में हैं। अगर तिथि या नक्षत्र दिन में बदलता है, तो बदलने के क्षण से नया मान लागू होता है, इसलिए सुबह और शाम के मान अलग हो सकते हैं। किसी दूसरे शहर की यात्रा हो तो गंतव्य का पंचांग देखें।
पंचांग के पाँच अंग, राहुकाल, अभिजित और अमृत काल का अर्थ मुख्य पंचांग पृष्ठ पर समझाया गया है। अपने सटीक स्थान और जन्म चंद्रमा के अनुसार व्यक्तिगत आकलन के लिए मिनी ऐप में जयपुर या अपना स्थान चुनें।
सवाल-जवाब
जयपुर का पंचांग कब अपडेट होता है?
यहाँ सूर्योदय मौसम पूर्वानुमान से अलग क्यों है?
जयपुर में आज राहुकाल कब है?
क्या जयपुर का पंचांग पास के शहर के लिए भी सही है?
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