लेख
तिथि: चंद्र दिवस
तिथि चंद्र दिवस है, वह समय जिसमें चंद्रमा और सूर्य के बीच का कोण 12° बदलता है। चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। ये भारतीय कैलेंडर की रीढ़ हैं: त्योहार, व्रत और कामों के लिए दिनों का चुनाव, सब तिथि के अनुसार होता है।
संक्षेप में
- 1 तिथि = चंद्रमा और सूर्य के बीच 12° का अंतर; महीने में 30।
- शुक्ल पक्ष बढ़ता चंद्रमा है (तिथियाँ 1–15), कृष्ण पक्ष घटता।
- पाँच समूह: नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा।
- पूर्णिमा पूर्ण चंद्रमा से और अमावस्या सूर्य–चंद्र युति से जुड़ी तिथियाँ हैं; एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है।
- सूर्योदय के समय की तिथि आम तौर पर दिन की तिथि मानी जाती है (उदया तिथि)।
| № | नाम | किसके लिए शुभ |
|---|---|---|
| 1 / 16 | प्रतिपदा | आरंभ, नींव रखना |
| 2 / 17 | द्वितीया | स्थायी कार्य, निर्माण, आभूषण |
| 3 / 18 | तृतीया | कला, संगीत, शृंगार |
| 4 / 19 | चतुर्थी | बाधाएँ दूर करना; नई शुरुआत के लिए नहीं |
| 5 / 20 | पंचमी | उपचार, औषधि, शुभ कार्य |
| 6 / 21 | षष्ठी | स्वास्थ्य, बाधाओं पर विजय |
| 7 / 22 | सप्तमी | यात्रा, वाहन, स्थान परिवर्तन |
| 8 / 23 | अष्टमी | रक्षा, दृढ़ता, साधना |
| 9 / 24 | नवमी | साहसिक, कठोर कार्य; नई शुरुआत के लिए नहीं |
| 10 / 25 | दशमी | सफलता, शुभ कार्य, यात्रा |
| 11 / 26 | एकादशी | व्रत, प्रार्थना, साधना |
| 12 / 27 | द्वादशी | पूजा-अनुष्ठान, दान |
| 13 / 28 | त्रयोदशी | मित्रता, आनंद, उत्सव |
| 14 / 29 | चतुर्दशी | कठोर कार्य; नई शुरुआत के लिए नहीं |
| 15 | पूर्णिमा | पूर्णता, पूजा-अनुष्ठान, शुभ आरंभ |
| 30 | अमावस्या | पितृ, विश्राम, मौन; नई शुरुआत के लिए नहीं |
तिथि की गणना कैसे करें: पाँच चरण
- सूर्य और चंद्रमा के भोगांश। जिस क्षण के लिए चाहिए, उसके सूर्य और चंद्रमा की स्थितियाँ लें। राशिचक्र का कोई महत्व नहीं: अंतर सायन और निरयन दोनों में समान रहता है।
- अंतर। चंद्रमा के भोगांश में से सूर्य का भोगांश घटाएँ। परिणाम ऋणात्मक हो तो 360° जोड़ दें। यह वह दूरी है जितना चंद्रमा सूर्य से आगे निकल चुका है।
- 12° से भाग दें। कोण ÷ 12°: पूर्णांक भाग में एक जोड़ने पर चंद्र मास में तिथि की संख्या मिलती है, 1 से 30 तक।
- पक्ष। तिथि 1–15 शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) की हैं, 16–30 कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) की; दूसरे भाग में 15 घटाएँ। शुक्ल की 15वीं पूर्णिमा है, 30वीं अमावस्या।
- दिन की तिथि। पंचांग में एक दिन उस तिथि के नाम से जाना जाता है जो आपके शहर में सूर्योदय पर चल रही हो, भले ही वह एक घंटे बाद समाप्त हो जाए।
चंद्रमा को चलाएँ: तिथि कैलकुलेटर
यह कोण बताता है कि चंद्रमा सूर्य से कितना आगे निकल चुका है। स्लाइडर खींचें और देखें कि तिथि और चंद्रमा की कला कैसे बदलती है।
तिथि कैसे गिनी जाती है
चंद्रमा दिन में लगभग 12° सूर्य से आगे बढ़ता है। जब अंतर 12° होता है, दूसरी तिथि शुरू होती है, 24° पर तीसरी, और इसी तरह 360° तक। चंद्रमा की गति बदलती रहती है, इसलिए तिथि 19 से 26 घंटे तक चलती है। कभी पूरी तिथि दो सूर्योदयों के बीच समा जाती है (क्षय तिथि), या दो सूर्योदयों तक फैल जाती है (अधिक, यानी वृद्धि तिथि)।
महीने के दो पक्ष
शुक्ल पक्ष, “उजला पक्ष”, अमावस्या से पूर्णिमा तक चलता है: प्रतिपदा (1) से पूर्णिमा (15) तक की तिथियाँ। कृष्ण पक्ष, “अँधेरा पक्ष”, पूर्णिमा से अमावस्या तक: प्रतिपदा से अमावस्या तक। बढ़ता चंद्रमा परंपरा से शुरुआत के लिए बेहतर समय है।
पाँच समूह
तिथियाँ पाँच गुणों को दोहराती हैं: नंदा (आनंद — 1, 6, 11), भद्रा (कल्याण — 2, 7, 12), जया (विजय — 3, 8, 13), रिक्ता (रिक्त — 4, 9, 14) और पूर्णा (पूर्ण — 5, 10, 15/30)। रिक्ता तिथियाँ आम तौर पर शुरुआत के लिए टाली जाती हैं, पर शुद्धि और समापन के कामों के लिए उपयुक्त हैं।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, जो विष्णु को समर्पित व्रत से जुड़ी है; देखें एकादशी। पूर्णिमा तिथि में सूर्य–चंद्र का अंतर 168° से 180° तक और अमावस्या में 348° से 360° तक होता है। पूर्ण चंद्रमा और सूर्य–चंद्र युति इनके अंत के खगोलीय क्षण हैं। पूर्णिमा पर दान और उत्सव, अमावस्या पर पितरों का स्मरण तथा कृष्ण चतुर्दशी पर शिवरात्रि का प्रचलन है।
सवाल-जवाब
तिथि कैलेंडर के दिन से कैसे अलग है?
आज कौन-सी तिथि है?
क्षय तिथि क्या है?
कोई त्योहार कभी-कभी दो दिन क्यों मनाया जाता है?
यह भी देखें
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