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पंचांग

पंचांग — कोलकाता, 31 अक्टूबर 2026

कोलकाता के लिए दिन का वैदिक पंचांग: पंचांग के पाँच अंग उनके बदलने के समय के साथ, सूर्योदय और सूर्यास्त, अशुभ और शुभ काल। हर दिन स्थानीय सूर्योदय से दोबारा गणना।

पिछला दिन · अगला दिन · आज

31 अक्टूबर 2026

अगला पर्व: अहोई अष्टमी — 1 नवंबर 2026, कल।

अंगमानकिसके लिए शुभ
तिथिषष्ठी (कृष्ण पक्ष) तक 16:58स्वास्थ्य, बाधाओं पर विजय
नक्षत्रआर्द्रा तक 07:12शोध, पुराने का त्याग; नई शुरुआत के लिए नहीं
योगसिद्ध तक 17:32कार्यों में सफलता
करणगर तक 06:09कृषि, गृहस्थी
वारशनिवार अनुशासन, परिश्रम, कार्य पूर्ण करना

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय05:40
सूर्यास्त16:59
चंद्रोदय21:59
चंद्रास्त10:52

अशुभ काल

राहुकाल08:30–09:55
यमगंड12:45–14:10
गुलिक काल05:40–07:05

शुभ मुहूर्त

अभिजित10:57–11:42

चांद्र पंचांग

चांद्र मास (अमांत)आश्विन
पक्षकृष्ण पक्ष

आज चंद्र राशि के अनुसार

दोपहर में चंद्रमा मिथुन में है, पुनर्वसु नक्षत्र में। वह 07:12 बजे पुनर्वसु नक्षत्र में आया।

आपकी चंद्र राशिआपकी राशि से आज का चंद्रमाआपके नक्षत्र से तारा बलआज किसके लिए अनुकूल
मेषतीसरा भाव · बलवानअश्विनी: साधक ✓ → वध ×
भरणी: प्रत्यरि × → साधक ✓
कृत्तिका: क्षेम ✓ → प्रत्यरि ×
भाग-दौड़, फ़ोन, छोटी यात्राओं और छोटी शुरुआतों के लिए ऊर्जा।
वृषभदूसरा भाव · सामान्यकृत्तिका: क्षेम ✓ → प्रत्यरि ×
रोहिणी: विपत् × → क्षेम ✓
मृगशिरा: संपत् ✓ → विपत् ×
परिवार, भोजन और पैसों की बातें। नरमी से बोलें, और आज उधार देने से बचें।
मिथुनपहला भाव · बलवानमृगशिरा: संपत् ✓ → विपत् ×
आर्द्रा: जन्म ○ → संपत् ✓
पुनर्वसु: अतिमित्र ✓ → जन्म ○
चंद्रमा आपकी अपनी राशि पर है: मन भावुक रहेगा। निजी काम, आराम और शरीर की देखभाल के लिए अच्छा दिन।
कर्कबारहवाँ भाव · कमज़ोरपुनर्वसु: अतिमित्र ✓ → जन्म ○
पुष्य: मित्र ✓ → अतिमित्र ✓
आश्लेषा: वध × → मित्र ✓
आराम, एकांत और काम पूरे करना; ख़र्च और नींद का ध्यान रखें।
सिंहग्यारहवाँ भाव · बलवानमघा: साधक ✓ → वध ×
पूर्वा फाल्गुनी: प्रत्यरि × → साधक ✓
उत्तरा फाल्गुनी: क्षेम ✓ → प्रत्यरि ×
लाभ, मित्र और अनुरोध: जो चाहिए, माँग लीजिए।
कन्यादसवाँ भाव · बलवानउत्तरा फाल्गुनी: क्षेम ✓ → प्रत्यरि ×
हस्त: विपत् × → क्षेम ✓
चित्रा: संपत् ✓ → विपत् ×
काम और सार्वजनिक ज़िम्मेदारियाँ: अपना किया हुआ काम दिखाने का दिन।
तुलानौवाँ भाव · सामान्यचित्रा: संपत् ✓ → विपत् ×
स्वाती: जन्म ○ → संपत् ✓
विशाखा: अतिमित्र ✓ → जन्म ○
गुरु, प्रार्थना, अध्ययन और लंबी यात्राओं की योजना।
वृश्चिकआठवाँ भाव · कमज़ोरविशाखा: अतिमित्र ✓ → जन्म ○
अनुराधा: मित्र ✓ → अतिमित्र ✓
ज्येष्ठा: वध × → मित्र ✓
शांत दिन: जोखिम भरे फ़ैसले और पैसों के मामले टालें, बारीकियाँ जाँच लें।
धनुसातवाँ भाव · बलवानमूल: साधक ✓ → वध ×
पूर्वाषाढा: प्रत्यरि × → साधक ✓
उत्तराषाढा: क्षेम ✓ → प्रत्यरि ×
मुलाक़ातें, साझेदारी और समझौते अच्छे चलते हैं।
मकरछठा भाव · बलवानउत्तराषाढा: क्षेम ✓ → प्रत्यरि ×
श्रवण: विपत् × → क्षेम ✓
धनिष्ठा: संपत् ✓ → विपत् ×
अटके काम निपटाने, सेहत की दिनचर्या बनाने और विवाद सुलझाने के लिए अच्छा।
कुंभपाँचवाँ भाव · सामान्यधनिष्ठा: संपत् ✓ → विपत् ×
शतभिषा: जन्म ○ → संपत् ✓
पूर्वा भाद्रपद: अतिमित्र ✓ → जन्म ○
पढ़ाई, बच्चे और रचनात्मक काम; जोखिम भरे दाँव से दूर रहें।
मीनचौथा भाव · कमज़ोरपूर्वा भाद्रपद: अतिमित्र ✓ → जन्म ○
उत्तरा भाद्रपद: मित्र ✓ → अतिमित्र ✓
रेवती: वध × → मित्र ✓
घर और मन की शांति पर ध्यान दें: घर का दिन है, बड़े काम शुरू करने का नहीं।

चंद्र बल आज के चंद्रमा को आपकी जन्म राशि से गिनता है: पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में बलवान, चौथे, आठवें और बारहवें में कमज़ोर। तारा बल आज के नक्षत्र को आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ करके गिनता है: ✓ शुभ, ○ आपका अपना तारा (मिश्रित), × महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए नहीं। यह आपकी चंद्र राशि वाले सभी लोगों के लिए सामान्य फल है; अधिक निर्णय आपकी कुंडली और चल रही दशा करती है।

कोलकाता के लिए समय कैसे पढ़ें

इस पृष्ठ के सभी समय कोलकाता के स्थानीय समय में हैं। अगर तिथि या नक्षत्र दिन में बदलता है, तो बदलने के क्षण से नया मान लागू होता है, इसलिए सुबह और शाम के मान अलग हो सकते हैं। किसी दूसरे शहर की यात्रा हो तो गंतव्य का पंचांग देखें।

पंचांग के पाँच अंग, राहुकाल, अभिजित और अमृत काल का अर्थ मुख्य पंचांग पृष्ठ पर समझाया गया है। अपने सटीक स्थान और जन्म चंद्रमा के अनुसार व्यक्तिगत आकलन के लिए मिनी ऐप में कोलकाता या अपना स्थान चुनें।

सवाल-जवाब

कोलकाता का पंचांग कब अपडेट होता है?
हर दिन: मान कोलकाता के स्थानीय समय में आज की तारीख के लिए निकाले जाते हैं।
यहाँ सूर्योदय मौसम पूर्वानुमान से अलग क्यों है?
JyotiSoft सूर्योदय सूर्य बिंब के केंद्र से, बिना वायुमंडलीय अपवर्तन के गिनता है; मौसम सेवाएँ और कई पंचांग ऊपरी किनारा और अपवर्तन लेते हैं। इसलिए सूर्योदय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, और राहुकाल व दूसरे काल भी उसी के साथ खिसकते हैं।
कोलकाता में आज राहुकाल कब है?
राहुकाल हर दिन बदलता है: यह कोलकाता के स्थानीय सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान का आठवाँ भाग है, और कौन-सा भाग होगा, यह सप्ताह के दिन से तय होता है। आज का समय ऊपर की तालिका में है; यमगंड और गुलिक काल भी उसी तरह गिने जाते हैं।
क्या कोलकाता का पंचांग पास के शहर के लिए भी सही है?
पास के शहरों में समय कुछ मिनट अलग हो सकता है; अंतर देशांतर, अक्षांश, ऋतु और समय-क्षेत्र पर निर्भर करता है। अपने स्थान के सटीक पंचांग के लिए मिनी ऐप में स्थान चुनें।

यह भी देखें

स्थितियाँ और तालिकाएँ: निरयण राशिचक्र, लाहिरी अयनांश — जैसा पेशेवर ज्योतिषी उपयोग करते हैं; वही गणना जिससे JyotiSoft कुंडली बनाता है।

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  • वर्तमान और आगामी दशाओं का एक वैदिक विश्लेषण
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