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लेख

एकादशी: ग्यारहवाँ चंद्र दिवस

एकादशी चंद्र मास के हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — लगभग महीने में दो बार। भारतीय परंपरा में यह विष्णु को समर्पित व्रत और साधना का दिन है। व्रत की तारीख़ स्थानीय सूर्योदय और स्मार्त या वैष्णव परंपरा के नियमों से तय होती है; तिथि के खगोलीय आरंभ और अंत का क्षण केवल स्थान बदलने से नहीं बदलता।

संक्षेप में

  • साल में लगभग 24 एकादशियाँ; अधिक मास वाले वर्ष में 26।
  • तिथि स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि से तय होती है।
  • व्रत अगली सुबह पारण के समय में खोला जाता है।
  • परंपरा से अन्न और दालों से परहेज़ किया जाता है।
  • व्रत एक आध्यात्मिक साधना है, चिकित्सा सलाह नहीं।

एकादशी क्या है

एकादशी का अर्थ है “ग्यारहवीं”। यह शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) की ग्यारहवीं तिथि है। साल की हर एकादशी का पुराणों में अपना नाम और कथा है: निर्जला, वैकुंठ, देवशयनी, देवउठनी और अन्य।

तिथि कैसे तय होती है

एकादशी उस दिन रखी जाती है जब स्थानीय सूर्योदय के समय एकादशी तिथि चल रही हो। इसलिए दिल्ली, लंदन और न्यूयॉर्क में तारीख़ अलग हो सकती है। जब एकादशी दो सूर्योदयों तक फैली हो या पिछली तिथि से मिली हो, तो वैष्णव पंचांग अतिरिक्त नियम लागू करते हैं। सही तारीख़ केवल आपके शहर के पंचांग से मिलती है।

व्रत और पारण

पारंपरिक व्रत में अन्न और दालों से परहेज़ किया जाता है; कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं। व्रत का पारण अगले दिन स्थानीय पंचांग के निर्धारित समय में किया जाता है। द्वादशी का पहला चौथाई भाग हरि वासर कहलाता है; पारण उसके समाप्त होने के बाद और सामान्यतः द्वादशी समाप्त होने से पहले करें। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, गर्भावस्था या बच्चों के मामले में कठोर व्रत का निर्णय डॉक्टर की सलाह से लें।

JyotiSoft में एकादशी

JyotiSoft का कैलेंडर आपके शहर के लिए एकादशी और पारण का समय दिखाता है, जो स्थानीय सूर्योदय से गिना गया है और प्रामाणिक पंचांगों से मिलाकर जाँचा गया है।

सवाल-जवाब

साल में कितनी एकादशियाँ होती हैं?
आम तौर पर 24; अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) वाले वर्ष में 26।
अलग-अलग साइटों पर एकादशी की तारीख़ अलग क्यों है?
तारीख़ स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि और परंपरा के नियमों (स्मार्त या वैष्णव) पर निर्भर करती है।
पारण क्या है?
अगली सुबह का वह समय जिसमें एकादशी का व्रत खोला जाता है।
क्या व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं। यह स्वैच्छिक आध्यात्मिक साधना है; इसका उद्देश्य एकाग्रता है, भूख नहीं।

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