ज्योतिष संदर्भ
वैदिक ज्योतिष की 12 राशियाँ
राशि निरयण राशिचक्र के बारह हिस्सों में से एक है, हर एक 30° का। मेष से मीन तक के नाम सबके जाने-पहचाने हैं, पर ज्योतिष में राशियाँ ऋतुओं से नहीं, तारों से गिनी जाती हैं — और आपके लग्न तथा चंद्रमा की राशि सूर्य की राशि से कहीं ज़्यादा मायने रखती है।
| नाम | संक्षेप में |
|---|---|
| मेष | अग्नि, चर, स्वामी मंगल। सूर्य उच्च, शनि नीच। |
| वृषभ | पृथ्वी, स्थिर, स्वामी शुक्र। यहाँ चंद्रमा उच्च का होता है। |
| मिथुन | वायु, द्विस्वभाव, स्वामी बुध। संवाद, व्यापार, विद्या। |
| कर्क | जल, चर, स्वामी चंद्र। गुरु उच्च, मंगल नीच। |
| सिंह | अग्नि, स्थिर, स्वामी सूर्य। अधिकार, रचनात्मकता, गरिमा। |
| कन्या | पृथ्वी, द्विस्वभाव, स्वामी बुध। बुध उच्च, शुक्र नीच। |
| तुला | वायु, चर, स्वामी शुक्र। शनि उच्च, सूर्य नीच। |
| वृश्चिक | जल, स्थिर, स्वामी मंगल। यहाँ चंद्रमा नीच का होता है। |
| धनु | अग्नि, द्विस्वभाव, स्वामी गुरु। धर्म, अध्यापन, आस्था, यात्रा। |
| मकर | पृथ्वी, चर, स्वामी शनि। मंगल उच्च, गुरु नीच। |
| कुंभ | वायु, स्थिर, स्वामी शनि। समाज, आदर्श, विज्ञान, सेवा। |
| मीन | जल, द्विस्वभाव, स्वामी गुरु। शुक्र उच्च, बुध नीच। |
निरयण, सायन नहीं
पश्चिमी राशिचक्र वसंत विषुव से शुरू होता है, एक ऐसा बिंदु जो तारों की पृष्ठभूमि में हर 72 वर्ष में लगभग एक अंश पीछे खिसकता है। ज्योतिष राशिचक्र को तारों से बाँधकर रखता है। दोनों के बीच का अंतर — अयनांश — इस समय लगभग 24° है। JyotiSoft लाहिरी अयनांश का प्रयोग करता है, जो चित्रा तारे से जुड़ी चित्रापक्ष परंपरा पर आधारित है और भारतीय राष्ट्रीय पंचांग में भी अपनाया गया है। इसमें चित्रा तुला के 0° के पास होता है; उसे हमेशा ठीक 0° पर रखने वाली गणना True Chitrapaksha है। यदि कोई बिंदु सायन राशि के पहले लगभग 24° में है, तो लाहिरी अयनांश के अनुसार वह निरयण कुंडली में पिछली राशि में आएगा।
राशि क्या बताती है
हर राशि का एक स्वामी होता है (वह ग्रह जिसकी वह राशि है), एक तत्व (अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल) और एक स्वभाव: चर राशियाँ काम शुरू करती हैं, स्थिर राशियाँ उसे थामती हैं, द्विस्वभाव राशियाँ परिस्थिति के अनुसार ढलती हैं। ग्रह जिस राशि में बैठा हो, उसका रंग ले लेता है, और स्वराशि या उच्च राशि में सबसे बलवान होता है। JyotiSoft की मुख्य राशि कुंडली में लग्न राशि से पूरी-पूरी राशियों को भाव माना जाता है। ज्योतिष में भाव चलित जैसी दूसरी भाव-गणना पद्धतियाँ भी प्रचलित हैं।
“आपकी राशि” कौन-सी है
वैदिक विश्लेषण में तीन राशियाँ मायने रखती हैं: लग्न, यानी जन्म के समय पूर्व में उदित हो रही राशि, जो शरीर और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को आकार देती है; चंद्र राशि (राशि का संकीर्ण अर्थ), जिससे अख़बारों का राशिफल और साढ़े साती देखी जाती है; और सूर्य राशि, जो बहुत पीछे तीसरे स्थान पर है। जब कोई पूछता है “आपकी राशि क्या है?”, तो उसका आशय चंद्र राशि से होता है। लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए उसके लिए सटीक जन्म समय चाहिए।
राशियाँ और नक्षत्र
हर राशि में सवा दो नक्षत्र (नौ चरण) आते हैं। मेष, सिंह और धनु से नक्षत्रों का नया चक्र शुरू होता है; कर्क, वृश्चिक और मीन पर एक चक्र समाप्त होता है — इनके बीच की सीमाएँ संवेदनशील गंडांत बिंदु हैं। हर राशि के पृष्ठ की तालिका में उसके नक्षत्र दिए गए हैं, ताकि आप एक स्तर और गहराई में जा सकें।
सवाल-जवाब
वैदिक ज्योतिष में मेरी राशि पश्चिमी राशि से अलग क्यों है?
राशि शब्द का ठीक-ठीक अर्थ क्या है?
क्या राशि जानने के लिए जन्म समय चाहिए?
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